जालौन : जिले में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। एक महिला ने तीन साल पहले नसबंदी करवाई थी। उसने अब बच्चे को जन्म दिया है। आर्थिक तंगी से जूझ रही महिला अपने पति के साथ अधिकारियों के पास पहुंची। उसने गुहार लगाई कि जो कुछ भी करना था वह पहले ही किया जा चुका है, अब सरकार बच्चे की परवरिश का खर्च उठाए। आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए दंपति ने सरकारी मदद मांगी। जालौन जिले के डकोर के रहने वाले भानु प्रताप ने बताया कि उनकी पत्नी का नाम भूरी है। उनके दो बच्चे हैं, अमित (6) और वृषभान (4)। अंश का जन्म 1.5 साल पहले हुआ था। उन्होंने बताया कि दो बच्चे होने के बाद उन्होंने 2023 में अपनी पत्नी भूरी की सरकारी अस्पताल में नसबंदी करवाई थी।
नसबंदी के बाद हेल्थ डिपार्टमेंट ने इसे पूरी तरह सफल बताया। दंपत्ति संतुष्ट थे। भानु प्रताप ने आरोप लगाया कि नसबंदी के 1.5 साल बाद उनकी पत्नी ने एक बेटे अंश (1.5) को जन्म दिया। उन्होंने इस मामले की शिकायत हेल्थ डिपार्टमेंट से की, लेकिन उनकी शिकायत अनसुनी कर दी गई। वह 2 अप्रैल 2024 से इसकी शिकायत कर रहे हैं। महिला के पति भानु प्रताप ने बताया कि उनके परिवार में उनकी पत्नी और बच्चे, उनके पिता रामसेवक और भाई मनोज हैं। भानु प्रताप राजमिस्त्री हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है। इस वजह से दो बच्चों के बाद उनकी पत्नी की नसबंदी करवाई गई, लेकिन अब उनका तीसरा बच्चा भी है। शुक्रवार को उन्होंने और उनकी पत्नी ने इस बारे में जालौन के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को एक ज्ञापन दिया।
डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने CMO को मामले की जांच करने का आदेश दिया है। भानु प्रताप का कहना है कि पैसे की तंगी की वजह से उन्होंने अपनी पत्नी की नसबंदी करवाने का फैसला किया। अब उनकी पत्नी ने एक बच्चे को जन्म दिया है। वे इसे हेल्थ डिपार्टमेंट की बड़ी लापरवाही बता रहे हैं। वे सरकार के “हम दो, हमारे दो” कैंपेन में भी लापरवाही की बात कह रहे हैं। दंपत्ति की मांग है कि सरकार इस मामले में दखल दे। उन्हें सरकार से बच्चों की देखभाल का खर्च मिलना चाहिए। उनका कहना है कि इसके पीछे हेल्थ डिपार्टमेंट की लापरवाही है, इसलिए सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
जालौन के चीफ मेडिकल ऑफिसर, डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि मामला डकोर इलाके का है और शिकायत मिली है। उन्होंने कहा कि केस की फाइल मंगाई जा रही है और जांच चल रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि किसी लेवल पर लापरवाही हुई है या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के आधार पर सरकारी नियमों के मुताबिक मुआवजे के बारे में फैसला लिया जाएगा। शिकायत एडमिनिस्ट्रेटिव लेवल पर हेल्थ डिपार्टमेंट को भेज दी गई है, और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

